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Monday, October 25, 2010

सपनें..!! - 2


आज मेरी आँखों में नींद है पर मन में नहीं,
कुछ ऐसे ख़्यालों को बुन लिया है मैंने जिन्हें
कागज़ पर उतारने का मज़ा आ रहा है;
इसी आनंद की अनुभूति रोक लेती है
बिस्तर पर गिर जाने और आँखे मूँद लेने से,
प्यारी नींद लेने से और सपनें देखने से,
क्योंकि..
जागती आँखों के सपनें, सोई आँखों के सपनों से
अधिक प्यारे, ख़ूबसूरत और यादगार होते है;
बढ़ाते है उम्मीद और ख़ुशी,
और बनते है जीने का सहारा !! :-)

Image coustesy for both poems (सपने..!! - 1 सपनें..!! - 2) - Google Search.

11 comments:

S.M.HABIB said...

बहत सुन्दर अभिव्यक्ति निशा जी. बधाई.

A said...

Excellent

bibhash k jha said...

love the lucidity

Thearte of the Absurd

नीरज गोस्वामी said...

जागती आँखों के सपनें, सोई आँखों के सपनों से
अधिक प्यारे, ख़ूबसूरत और यादगार होते है;

वाह कितनी प्यारी बात कही है आपने...बधाई...

नीरज

Nisha said...

@ S.M.HABIB, A, Bibhash K Jha and Niraj Goswami - Healtly thanks to all of you. Your comments encourage me to show you my lines. Thanks again.

parveen kumar snehi said...

kya baat hai ji...wah..

mridula pradhan said...

bahut achchi lagi.

अनिल कान्त said...

well said

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

निशा जी
नमस्कार !
आपकी कई रचनाएं पढ़ीं …
अच्छी रचनाओं के लिए बधाई !
जागती आँखों के सपनें, सोई आँखों के सपनों से अधिक प्यारे, ख़ूबसूरत और यादगार होते है;
बढ़ाते है उम्मीद और ख़ुशी, और बनते है जीने का सहारा !!

वाह ! क्या कहने !

ईश्वर से प्रार्थना है कि आपके जागती आंखों के सपने साकार हों ! आमीन !!

आपको और परिवारजनों को दीवाली की हार्दिक मंग़लकामनाएं !

सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान !
लक्ष्मी बरसाए कृपा , बढ़े आपका मान !!


- राजेन्द्र स्वर्णकार

Nisha said...

Namskaar Rajendra Swarnkar.. aapki hoslaafjaahi aur khubsurat prarthana ke liye bahut bahut shukriya.

राकेश कौशिक said...

देर से आ पाया

"जागती आँखों के सपनें, सोई आँखों के सपनों से
अधिक प्यारे, ख़ूबसूरत और यादगार होते है;
बढ़ाते है उम्मीद और ख़ुशी"

कुछ अलग पढ़ा - सुखद अनुभूति