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Sunday, May 23, 2010

WISH!!!!


Hariprasad - They have approved of your son as bridegroom for their daughter। Now go ahead and enquire what u want to know about them and also meet their girl. We have already settled the issue of money.

Ramesh - Yes, Hariprasad! we had but now we want six instead of four.

Hariprasad - But at first you had agreed for four. That's why they stepped forward in this direction.

Ramesh - yes, but now the thing is different.

Hariprasad - I think you are asking for more than enough. They wouldn't agree, still for once i will talk to them.

Hariprasad talked to the girl's father Mohan but he refused to give more dowry and the matter ended. Since Mohan and Ramesh had met once in the connection of the marriage of their kids, they were now acquaintances. They often saw each other . On his way, one day Ramesh met Mohan and both started talking. In the neighbourhood of Ramesh there lived a young boy Shiv for whom a suitable match was being searched. Ramesh considered Shiv and his family as inferior to his and their demand for money was also less. So he suggested to Mohan the boy as suitable match for his girl. Both of the families completed necessary enquiries and met each other for final settlement. Shiv and the girl liked each other and consented for the marriage. After the engagement, Shiv's family was all praise for his fiancee's beauty as well as qualities and thanked Ramesh for the match. The Big Day arrived. Ramesh's family also attended the marriage and felt proud that they have been the go between the two parties. But the moment they saw the bride, they were swept away by her shining beauty. Slightly smiling the immensely charming bride put garland in Shiv's neck and wedded him. On the other side stood Rohit, lamenting, " If only Papa had not demanded more money. Wish ! I had seen the girl first. And Wish ! I had the courage to tell my papa that not money but a beautiful and virtuous girl is more important to me." At the same time Ramesh's family went to congratulate the newly married couple and Shiv introduced his bride to his neighbouring friend Rohit. Rohit's face became white when the bride said "Nameste Bhaiya...".

P.S. - I pay regards to my teacher and friend Mrs. Maneesha Bansal to help me in translating it in english so beautifully. Originally I wrote it in hindi and wanted to post it in english too. Thanks google for the picture.

Wednesday, May 19, 2010

काश!!!



हरी प्रसाद - रमेश जी, आपका बेटा तो उन लोगों को पसंद है। अब आप उनके विषय में जो जानना चाहते हैं पता कर ले व लड़की भी देख लें। रुपये पैसे की बात तो हमारी पहले ही हो चुकी है।
रमेश - हाँ हरी प्रसाद जी, बात तो हो चुकी है परन्तु हम चार नहीं छह में रिश्ता करेंगे।
हरी प्रसाद - परन्तु पहले तो आप ही ने चार में हाँ कही थी, तभी तो उन्होंने आगे कदम बढाया है।
रमेश - हाँ, परन्तु अब बात और है।
हरी प्रसाद - मेरे विचार से आप अधिक मांग कर रहे है, वो इन्कार करेंगे, फिर भी मैं एक बार उनसे बात कर लूँगा।
हरी प्रसाद ने लड़की के पिता मोहन से बात की परन्तु उन्होंने अधिक धन देने से मना कर दिया और रिश्ता नहीं बना। चूँकि मोहन रिश्ते के सिलसिले में रमेश से एक बार मिल चुके थे इसलिए वो अब एकदूसरे को पहचानते थे और कुछ ही दूरी पर घर होने के कारण अक्सर मिल जाया करते थे। इसी तरह एक दिन रमेश कहीं जाते समय मोहन से मिले व रुक कर कुछ देर बातें करने लगे। रमेश के पड़ोस ही में एक लड़का शिव रहता था जिसके लिए रिश्ते की खोज की जा रही थी। शिव व उसके परिवार को रमेश अपने से थोड़ा कमतर मानते थे और इन लोगों की मांग भी कम थी इसलिए रमेश ने इस रिश्ते का जिक्र रमेश ने मोहन से किया। दोनों परिवारों ने एक दूसरे को देखा जाना, लड़का लड़की से मिला और रिश्ता पक्का हो गया। सगाई के बाद से ही लड़के का परिवार लड़की की सुन्दरता व गुणों की तारीफ़ करता और रमेश जी को आभार व्यक्त करता। विवाह के दिन रमेश का परिवार भी गर्व के साथ विवाह में शामिल हुआ। परन्तु दुल्हन को देख कर रमेश व उनके बेटे रोहित की आँखें खुली की खुली रह गयी। मंद मंद मुस्काती अत्यंत खुबसूरत दुल्हन दुल्हे शिव को वरमाला पहना रही थी और इधर रोहित अफ़सोस कर रहा था, " काश! पापा ने अधिक पैसों की मांग न की होती। काश! हमने पहले लड़की को देखा होता और काश! की मैंने पापा से कहा होता की मैं धन के आधार पर नहीं बल्कि सुन्दर व गुनी लड़की से शादी करूँगा।"
उसी समय रमेश का परिवार नवविवाहित जोड़े को बधाई देने के लिए गए और शिव ने दुल्हन को अपने पडोसी दोस्त रोहित से परिचित करवाया। रोहित का चेहरा उतर गया था जब दुल्हन ने कहा, "नमस्ते भैया ..."।

Saturday, May 8, 2010

गद गद हो गई


एक दिन अध्यापक ने सभी विद्यार्थियों को कहा - 'गद गद होना' इस मुहावरे का वाक्य बनाओ।
अध्यापक ने गोलु से पूछा तो उसने बताया -'सालों बाद बेटे को देखकर माँ गद गद हो गई'।
गोलु के नकलची मोलु ने पड़ते ही कहा, 'नहीं... !! बेटे को देखते ही माँ पैड़ियों में गद गद* हो गई।'
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* गद से गिरना ( जोर से गिरना)
पीएस नोट - तस्वीर इन्टरनेट से ली गई एक क्लिप आर्ट है।

Thursday, May 6, 2010

चक्र




गर्मियों की भरी दोपहरी में,
आसमां में सूरज जब तमतमाया,
खुद भी जला, औरों को भी जलाया;
तारों से चमकने की होड़ में तो जीत गया वो,
पर किसी और को फूटी आँख ना सुहाया;
न किसी ने उसे देखा,
न ही कोई आसमां में देख पाया;
छा गया एक सूनापन आसमां में,
और जब टकराया ये सूनापन,
दिलों में भरी पीड़ा और सूनेपन से;
तो गिरने लगा सूरज,
टूटने लगा सारा दंभ और अभिमान;
रात भर के प्रायश्चित के बाद,
एक बार फिर सूरज जगमगाया,
नई ताजगी के साथ,
और ये चक्र दोहराता है बार बार।

पीएस. नोट - तस्वीर http://www.swpc.noaa.gov/primer/primer_graphics/Sun.pसे ली गई है।

Monday, May 3, 2010

I Miss You..

Here I am missing my adoring sister...




I don’t love to see you cry,
but I miss you most,
when it pains..

above is true but following is not lie too
that I miss you the same,
when it gains..

when the days are usual,
I miss u again,
coz I don’t wanna get bored alone.

Oh! I miss you at night with sleepless eyes,
when need you to talk for long,
lying on the bed along.

I miss you,
when I make a dish,
& need a food lover to taste and praise fulsomely..

When we are on an outing together
I miss you again to be with us,
to make the moments more adorable..

I miss you,
to laugh loudly along with our silly chit-chat,
& the stupid things we do together..

I miss you,
to have a fight & then again start talking,
with little frowning faces changing into smiling..

Oh! When I don’t miss you,
I miss you,
every day, every hour & every moment,
the most…