Pages

Showing posts with label एक चाह. Show all posts
Showing posts with label एक चाह. Show all posts

Monday, October 25, 2010

सपनें..!! - 2


आज मेरी आँखों में नींद है पर मन में नहीं,
कुछ ऐसे ख़्यालों को बुन लिया है मैंने जिन्हें
कागज़ पर उतारने का मज़ा आ रहा है;
इसी आनंद की अनुभूति रोक लेती है
बिस्तर पर गिर जाने और आँखे मूँद लेने से,
प्यारी नींद लेने से और सपनें देखने से,
क्योंकि..
जागती आँखों के सपनें, सोई आँखों के सपनों से
अधिक प्यारे, ख़ूबसूरत और यादगार होते है;
बढ़ाते है उम्मीद और ख़ुशी,
और बनते है जीने का सहारा !! :-)

Image coustesy for both poems (सपने..!! - 1 सपनें..!! - 2) - Google Search.

Sunday, August 1, 2010

इंतज़ार की घड़ियाँ


देख कर हमें वो प्यार से थे मुस्कुराए,
ये वहम था हमारा या उनकी अदाएँ!!

खुशबु से महकी थी रंगीन बगिया,
फूल ही थे यें या थी भवरों की सदाएँ!!

आह! ये कैसी हुई आहट!
वो आ गए है या ये उनके आने की है चाहत!!

आया है सीली सी हवा का झोंका,
बरसा है कहीं बादल या है ये आंसू भरी दुआएँ!!

Image courtesy - Image is a result of googling.

Monday, July 12, 2010

फूल,तितलियाँ,परियाँ और इन्द्रधनुष

आज फिर से इस मन ने कुछ कहा,
क्यों न किया जाए कुछ प्यारा प्यारा, कुछ नया;
आसमाँ में खिलाएं फूल महकते हुए,
बादलों में तितलियाँ हो चहकते हुए;
फूलों के रंगों में खो जाए इन्द्रधनुष,
डर कर 'न हो जाए गुम ही!',
भाग आयें ज़मीं पर फैल जाएँ सब और;
रंगीं ज़मीं पर खड़े हो हम निहारें आसमाँ,
एक नया ही इन्द्रधनुष फूल बनाते हों वहां,
सात रंगों से भी ज्यादा रंग बिखरे हों जहाँ;
तितलियाँ वहां की परी हों और,
परियां ज़मीं की तितलियाँ !!





Thursday, June 10, 2010

लिखें कैसे!

लिखना चाहतें है कविता,
पर लिखें कैसे!
उलझी है विचारों की संहिता,
हम लिखें कैसे!

कशमकश में हूँ मैं,
किस पर लिखूं कविता?
तूफ़ान है दिल में कई,
क्या उन्हें उड़ेल दूँ!
कि खुशबुएँ हैं जो यहाँ,
उन्हें बयार दूँ!

ख़्वाबों को सजाऊँ,
कि यादों को बताऊँ;
हो रहे है जो जुदा,
मैं उनको बहलाऊँ;
जो प्यार है, जो सार है,
उस रब को मैं गाऊँ!

सब कुछ समाया है इसी में,
सब कुछ समाया है यहाँ;
तो रब ही है कविता,
रब को बताएँ कैसे!
लिखना चाहतें है कविता,
पर लिखें कैसे!